Karnavedha Sanskar
कर्णवेध संस्कार: अर्थ, महत्व, विधि और वैदिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण सनातन वैदिक परंपरा का नवम संस्कार — स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं ज्ञानेंद्रियों के विकास का प्रतीक सनातन वैदिक परंपरा में मनुष्य के जीवन को श्रेष्ठ, अनुशासित एवं संस्कारित बनाने के लिए 16 संस्कारों का विधान किया गया है। प्रत्येक संस्कार का उद्देश्य… Read more »
Annapraashan Sanskar
अन्नप्राशन संस्कार: अर्थ, महत्व, विधि और वैदिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण सनातन वैदिक परंपरा का सातवाँ संस्कार — शिशु के अन्न ग्रहण का शुभ प्रारंभ सनातन वैदिक परंपरा में मनुष्य के जीवन को शुद्ध, अनुशासित और संस्कारित बनाने के लिए 16 संस्कारों का विधान किया गया है। ये संस्कार केवल धार्मिक अनुष्ठान… Read more »
Mundan Sanskar
मुण्डन संस्कार: अर्थ, महत्व, विधि और वैदिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण सनातन वैदिक परंपरा का अष्टम महत्वपूर्ण संस्कार — शारीरिक शुद्धि, स्वास्थ्य और मानसिक विकास का आधार सनातन वैदिक परंपरा में मानव जीवन को श्रेष्ठ, स्वस्थ और संस्कारित बनाने के लिए 16 संस्कारों का विधान किया गया है। ये संस्कार केवल धार्मिक… Read more »
Nishkraman Sanskar
निष्क्रमण संस्कार: अर्थ, महत्व, विधि और वैदिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण सनातन वैदिक परंपरा का षष्ठ (6ठा) महत्वपूर्ण संस्कार — शिशु का प्रकृति और बाह्य जगत से प्रथम परिचय सनातन वैदिक परंपरा में मनुष्य के जीवन को श्रेष्ठ, संस्कारित and संतुलित बनाने के लिए 16 संस्कारों का विधान किया गया है। ये… Read more »
Satsang Wali Nagri Chal Re Mana
सतसंग वाली नगरी चल रे मना “सतसंग वाली नगरी चल रे मना पी सत ज्ञान का जल रे मना सतसंग वाली नगरी… इस नगरी में ज्ञान की गंगा, जो भी नहाए हो जाए चंगा मल मल हो निर्मल रे मना सतसंग वाली नगरी… सतसंग के हैं अजब नजारे, बहुत सुहाने… Read more »
Jab Tak Jag Mein Shubh Karmon Ka
जब तक जग में शुभ कर्मों का जब तक जग में शुभ कर्मों का संचित सामान नहीं होगा। अच्छे व बुरे सब कर्मों से जाने पहचाने जाएंगे। जग में है कौन भला ऐसा जिसका इम्तिहान नहीं होगा।। जब तक जग में शुभ कर्मों का संचित सामान नहीं होगा। दुनिया में… Read more »

